शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपने के पश्चात अपर सचिव से चर्चा 

– फर्जीवाड़ा करने वाले पालकों,विद्यालय प्रबंधन सह RTE से सम्बंधित URC-BRC समिति सदस्यों पर आपराधिक मामला दर्ज करवाने की मांग करेगा एमओडीआई फाउंडेशन 

नागपुर – विधानसभा सत्र के दौरान शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ज्ञापन सौंपने के पश्चात अपर सचिव संतोष गायकवाड़ से निम्न मुद्दों पर चर्चा हुई जिस पर ‘NT’ की समीक्षा

१) मुफ़्त शिक्षा के अधिकार प्रवेश लेने की नियमावली 

समीक्षा – नियमावली पहले से ही बनी हुई है,अमूमन उसी के तहत शत प्रतिशत प्रवेश प्रक्रिया आदि हो रही हैं.अगर इसमें बदलाव चाहते हैं मांग करने वाले तो बदलाव के मुद्दे मांग पत्र से गायब दिखें। यह भी सोचने वाली विषय है कि बदलाव करवाने के पीछे का मकसद क्या हैं ?

२) शालाओं द्वारा मुफ़्त शिक्षा के अधिकार के छात्रों से ज़बरन पैसे वसूले संदर्भ 

समीक्षा – आरोपकर्ता का आरोप संगीन है लेकिन उदाहरण सह प्रकरण नहीं दे पाए.इनका मांग व्यापक होने की बजाय SELECTED SCHOOL निशाने पर था.क्यूंकि RTE अंतर्गत सिर्फ पढ़ाई वह भी ८ वीं तक मुफ्त हैं,शेष ACTIVITY के प्रशिक्षक सह सामग्री के लिए शुल्क लेना कोई गैरकानूनी नहीं हैं.

३) मुफ़्त में गणवेश तथा पुस्तक प्रावधान को शाला द्वारा न मानने बाबत

समीक्षा – उक्त मांग के सन्दर्भ में कोई GR नहीं हैं.विद्यार्थी गरीब हो या अमीर,उसके पालक अपने बच्चों को किसी का पहना हुआ कपड़ा नहीं पहनाएंगे।इस बार STATE BOARD ने RTE के बच्चों में URC आदि के माध्यम से पाठ्यपुस्तकें बांटी।लेकिन CBSE ने अपने अधीनस्त स्कूलों में कुछ नहीं वितरित किया।RTE केंद्र सरकार की योजना हैं,प्रत्येक प्राइवेट स्कूल को हर वर्ग के २५% प्रवेश RTE अंतर्गत देना अनिवार्य किया गया हैं.प्रत्येक वर्ष प्रत्येक स्कूल को RTE अंतर्गत कोटा सार्वजानिक घोषित करने का नियम हैं.अगर RTE नियमावली में गणवेश सह पाठ्यपुस्तक देना अनिवार्य है तो सरकार न वितरण करने वालों के खिलाफ क्यों चुप्पी साध रखी हैं ?

उल्लेखनीय यह है कि RTE ACTION समिति ने कुछ वर्ष पहले RTE अंतर्गत ८ वीं तक मुफ्त शिक्षा को १२ वीं तक करवाने के नाम पर सैकड़ों पालकों से लाखों में वसूली की थी,यह कह कर कि इस सन्दर्भ में जनहित याचिका दायर करेंगे।जब यह मामला गरमाया तो अब RTE ACTION समिति की सदस्यता के नाम पर ४-४ हज़ार रूपए लिए जा रहे हैं.

४) पालकों द्वारा झूठे दस्तावेज़ देकर प्रवेश लेने का मामला जिसमें दोषी पाए गए प्रशासन के अधिकारी तथा पालकों के विरुद्ध कार्रवाई 

समीक्षा – RTE ACTION समिति ने RTI के तहत 12 चुनिंदा विद्यालयों में RTE अंतर्गत हुई प्रवेश प्रक्रिया की जानकारी ली और जाँच में लगभग 6 दर्जन त्रुटियाँ पाई.इन्हें नियमानुसार सार्वजानिक कर कार्रवाई हेतु पहल करने के बजाय अचानक चुप्पी क्यों साधी गई,गर्मागरम चर्चा का विषय बना हुआ हैं.

RTE को सफल अंजाम देने के लिए URC-BRC जैसी समिति बनाई गई,जिसमें स्वेच्छा से अपनी सेवा वोलेंटियर सदस्य दे रहे है,इन समितियों पर काम का बोझ,समय का आभाव,प्रशासकीय लचर व्यवस्था के कारण काफी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा,इन्हीं में से कुछ अपनी रोटियां भी सेक रहे हैं.

५) नई शिक्षा नीति लागू करने हेतु

समीक्षा – TEACHING PATTERN में बदलाव PRACTICALLY संभव नहीं हैं.फ़िलहाल मामला ठंडे बस्ते में हैं.

६) मुफ़्त शिक्षा के अधिकार अंतर्गत आयु सीमा नई शिक्षा नीति अंतर्गत

समीक्षा – केंद्रीय विद्यालय ने हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में पहली कक्षा में ७ वर्ष के बच्चों को प्रवेश देने के मामले में.जिसे राज्य में भुनाने की कोशिश की जा रही हैं,इससे जिन बच्चों को पिछले साल उम्र ज्यादा होने के कारण पहली कक्षा में RTE अंतर्गत प्रवेश नहीं मिल पाया था,उन्हें लाभ हो सकता हैं.

७) मुफ़्त शिक्षा अधिकार अंतर्गत प्रवेश वेरीफिकेशन कमिटी को अनियमित रूप से स्थापित करने हेतु

समीक्षा – मांगकर्ता की समझ यह बन रही कि एक बार URC और BRC की सदस्य जिसे बना दिया जाए,उन्हें आजीवन कायम रखा जाए,इससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलेगा।फ़िलहाल हर वर्ष RTE अंतर्गत URC और BRC समिति का गठन किया जाता हैं.

८) १ से ४ कक्षा के बाद पाँचवी से आठवी की पढ़ाई जारी रख में प्रवेश दिलाने बाबत

समीक्षा – जब जिस विद्यालय में कक्षा चौथी तक ही थी,और पालक वर्ग ने उसे जानने के बाद उसी स्कूल में RTE अंतर्गत अपने बच्चों को प्रवेश दिलवाया. इसके बाद उस विद्यालय की कक्षा बढ़ गई तो पूर्व में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को उसका लाभ नहीं मिल सकता। पालकों के चुनिंदा स्कूलों में सिमित वर्ग होने के बावजूद प्रवेश दिलवाने के बाद जब बच्चों को आगे की पढाई के लिए पहल करने की जरूरत पड़ी तो पालक वर्ग अपने बच्चों को पैसे के आभाव में आगे की शिक्षा नहीं दिलवा पाए,ऐसे कई उदाहरण हैं.

९) मुफ़्त शिक्षा के अधिकार अंतर्गत अधिनियम धारा 18 के तहत पंजीयन करने बाबत

समीक्षा – स्कूल संचालक बारम्बार मांग के बावजूद RTE के तहत स्कूल का कोटा घोषित नहीं करते,जब EO का डंडा पड़ता हैं तब अंतिम समय में सूची सौंपते हैं.उसकी खास वजह यह है कि RTE अंतर्गत प्रवेश देने वाले विद्यार्थियों के एवज में प्रति विद्यार्थी केंद्र सरकार १७००० रूपए सालाना देती हैं.जो पिछले ४-५ साल से स्कूलों को नहीं मिला हैं.

उल्लेखनीय यह है कि RTE से सम्बंधित केंद्र सरकार, राज्य सरकार,शिक्षण विभाग,RTE समितियां की अनियमितताओं को लेकर जल्द ही एमओडीआई फाउंडेशन एक जनहित याचिका दायर करने जा रही है,समय रहते उक्त सभी संबंधितों ने व्यवस्था में सुधार नहीं किया तो होने वाली नुकसान के जिम्मेदार उक्त सभी की होगी।

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