विधायक प्रवीण दटके को हाई कोर्ट से अंतिम मौका, अन्यथा लगेगा जुर्माना

नागपुर :- सिटी में विकास शुल्क में 100 प्रतिशत वृद्धि को लेकर मनपा आयुक्त द्वारा 15 जनवरी 2021 को अधिसूचना जारी की गई थी. इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए अब विधायक प्रवीण दटके और अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है.

याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि कुछ तकनीकी मुद्दों को लेकर कार्यालय द्वारा आपत्ति दर्ज कराई गई थी जिसका याचिकाकर्ता ने निवारण नहीं किया. ऐसे में भविष्य में याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकती है. अत: 2 सप्ताह का अंतिम मौका प्रदान कर आपत्ति निवारण करने अन्यथा जुर्माना ठोकने की चेतावनी अदालत ने दी.

उल्लेखनीय है कि 18 फरवरी 2022 को हाई कोर्ट की ओर से प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया गया था जिसके बाद हलफनामा दायर करने के लिए समय-समय पर सुनवाई स्थगित होती रही है. अब 2 वर्ष बाद याचिका सुनवाई के लिए तो रखी गई लेकिन अब तक आपत्ति का निवारण नहीं किया गया है. इससे हाई कोर्ट की ओर से उक्त आदेश दिया गया.

2016 से कर दिया लागू

याचिका में बताया गया कि एमआरटीपी एक्ट की धारा 124बी के अंतर्गत 100 प्रतिशत की विकास शुल्क वृद्धि तर्कसंगत नहीं है. यहां तक कि इसे 30 जून 2016 से लागू कर दिया गया. सरकार की ओर से सिटी में मेट्रो रेल निर्माण करने के लिए महा मेट्रो कंपनी का गठन किया गया जिसके लिए 8,676 करोड़ रुपए के खर्च का अनुमान लगाया गया था. मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में मनपा को 5 प्रतिशत बोझ सहन करना है जिसके अनुसार महा मेट्रो ने मनपा से 434 करोड़ की मांग की है. याचिकाकर्ता ने याचिका में बताया कि एमआरटीपी एक्ट की धारा 124बी (3) के अनुसार विकास शुल्क में वृद्धि के लिए विशेष बैठक लेकर प्रस्ताव पारित करना होता है जिसका इसमें पालन नहीं किया गया. यहां तक कि मनपा आयुक्त को इस तरह से विकास शुल्क वृद्धि करने का अधिकार भी नहीं है. मनपा की विशेष सभा में पार्षदों द्वारा प्रस्ताव पारित करने के बाद ही इस तरह से शुल्क वृद्धि की जा सकती है.

मेट्रो को 313 करोड़ का हो चुका है भुगतान

याचिकाकर्ता का मानना है कि विकास शुल्क में 100 प्रतिशत वृद्धि का कोई औचित्य ही नहीं है. मनपा ने महा मेट्रो को पहले ही 313 करोड़ का भुगतान कर दिया है जिससे विकास शुल्क वृद्धि के लिए दिया गया यह कारण गैर कानूनी है. मनपा की सभा ने 22 जुलाई 2021 को मनपा आयुक्त की ओर से की गई वृद्धि को निरस्त कर दिया है. अध्यादेश जारी करने से पहले इसके ड्राफ्ट प्रस्ताव का पब्लिक नोटिस देना अनिवार्य है. लोगों के लिए कम से कम 2 समाचार पत्रों में इसका विज्ञापन देकर आपत्ति और सुझाव मांगे जाने चाहिए. इसके बाद ही इसे लागू किया जा सकता है लेकिन एमआरटीपी एक्ट के इन प्रावधानों को दरकिनार कर दिया गया.

एफएसआई के रूप में 200 करोड़ वसूल

याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि मनपा की 5 प्रतिशत की हिस्सेदारी के अनुसार मेट्रो कॉरिडोर में जो निर्माण होना है उसमें दिए जाने वाले अतिरिक्त एफएसआई से मनपा और मेट्रो को 50-50 प्रतिशत निधि प्राप्त होना है. इस तरह से एफएसआई के माध्यम से शहर की जनता ने 200 करोड़ का भुगतान पहले ही कर दिया है, इसलिए महा मेट्रो को अब कुछ भी देना बाकी नहीं है. इसके अलावा महा मेट्रो को मनपा की ओर से प्राइम जगहों पर भूमि उपलब्ध कराई गई है जिसका बाजार मूल्य 1,078 करोड़ है.

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