नागपुर मे धडल्ले से बिक रही सड़ी जहरीली सुपारी

– राज्य सरकार का फ़ूड विभाग चुप्पी साधे अवैध कृतो को बढ़ावा दे रहा,इस व्यवसाय को जिले के सफेदपोशों का संरक्षण  

नागपुर :- मार्च आते ही सभी डिपार्टमेंट के लोग काम पर लग जाते। फुड डिपार्टमेंट इस वक्त चूप बैठा है। इसके चलते सड़ी, जहरिली सुपारी का अवैध धंदा ‘बेरोकटोक’ जारी है। नागपुर में हर प्रत्येक 10 वां व्यक्ति/युवक को खर्रे की लत है। नागपुर में हर माह 250 से 300 ट्रक सुपारी आती है। इंडोनेशिया, श्रीलंकाई घटीया सुपारी पर अदालती बंदी है। वहा कि घटीया सुपारी दूसरे देशो के रास्ते लाई जाती है। इस घटीया दर्जे की सुपारी लाने में करोडो कि टॅक्‍स चोरी कि जाती है। इंडोनेशिया (विदेश) से आनेवाली सुपारी के मूल टॅक्‍स 108 प्रतिशत है। लेकिन ये चेन्नई पोर्ट मिस डिक्‍लेरेशन के चलते महज 18 प्रतिशत टॅक्‍स चूकाकर माल ला रहे है। पुलिस और फुड ॲन्ड ड्रग्ज विभाग से सेटींग के चलते यह धंदा काफी फल फुल रहा सभी मजे से चांदी काट रहे है।

300 ट्रक आती है सुपारी हर माह यह जानकर तो आपने दांतों तले उंगली ही दबा ली होगी और यह भी सोच रहे होंगे की क्या इतनी सुपारी को सब्जी की तरह खाया जाता है, जो इतनी खपत है। किसी मेहमान को सौंफ-सुपारी देकर विदा करने की परंपरा तो है, लेकिन उसमें इतनी सुपारी की खपत संभव ही नहीं। दरअसल, नागपुर पूरे देश में ही सुपारी की सप्लाई का हब बन चुका है। देशी और विदेशी सुपारियां पहले यहां आती हैं और यहां से उत्तरप्रदेश एवं पास-पड़ोस के राज्यों में गुटका, पान मसाला आदि बनाने वाली कंपनियों को सप्लाई की जाती है। हर महीने 75 गाड़ी सुपारी तो गुटखा बनाने वाले छोटे से बड़े ब्रांड वाली कंपनियों को यहीं से सप्लाई किया जाता है और बाकी का अधिकतर माल कटिंग कर (दाना बनाकर) खर्रा वालों को बेचा जाता है। आपको यह भी बताते चलें कि महाराष्ट्र में तंबाकू युक्त खर्रा, गुटका, सुंगधित सुपारी, जर्दायुक्त सुपारी मसाला ये सब प्रतिबंधित हैं, लेकिन फिर भी धड़ल्ले से हर पानठेले और किराना की दुकानों तक में बिक रहे हैं। भारी डिमांड के चलते खर्रा और गुटखा में तो घटिया प्रतिबंधित सुपारी भी उपयोग में लायी जा रही है। इंडोनेशियाई और श्रीलंकाई की घटिया सुपारी पर तो अदालती बंदी है फिर भी वहां की घटिया प्रतिबंधित सुपारी को दूसरे देशों के रास्ते

अच्छा माल के फर्जी कागजातों के जरिये भारत के बंदरगाहों में उतारा जाता है और फिर कंटेनरों से नागपुर लाया जाता है। घटिया सुपारी वाले खर्रा से मुंह का कैंसर होने का खतरा सर्वाधिक होता है, लेकिन फिर भी इस गोरखधंधे में लगे हुए नागों और सपोले अपने स्वार्थ में लोगों की जीवन खतरे में डाल रहे हैं। सुपारी को तस्करी को रोकने के लिए जिम्मेदार एजेंसियां और विभाग भी खामोश बैठी हैं,

जिससे संदेह होता है कि कहीं मिलीभगत से तो करोड़ों का यह खेल नहीं खेला जा रहा है। वर्तमान में नागपुर में देसी-विदेशी सुपारी के कारोबार में यानी आयात व सप्लाई में कुल 120 के करीब कारोबारी जुड़े हुए हैं, जिसमें 30 बड़े सप्लायर हैं।

सुपारी को कटिंग कर अपने ब्रांड से बेचने वालों की संख्या भी 30 के करीब ही है। लूज कटिंग कर सुपारी सप्लाई करने वाले व्यापारी भी 40 के आसपास हैं। सुपारी के इस धंधे में दलाल भी सक्रिय हैं, जो 20 के करीब है। इन सबका तगड़ा नेटवर्क है जो पूरे मध्यभारत में सुपारी की नंबर एक और नंबर दो तरीके से व्यापार के खेल में शामिल है। हालांकि इनमें 50 फीसदी व्यापारी ईमानदारी के साथ देसी सुपारी का ही कारोबार करते हैं या फिर सार्क देशों से जहां से सुपारी नियमानुसार लाया जा सकता है, वहां की

सुपारी का कारोबार करते हैं। इन्हेंप्रतिकिलो 10-20 रुपये का लाभ ही मिल पाता है, लेकिन जो सुपारी की तस्करी, टैक्सी चोरी, घटिया माल की सप्लाई के गे में धू मचा रहे हैं उन्हें यह मुनाफा 100 से 200 रुपये किलो तक होता है। बढ़ रहा इनका दबदबा नागपुर देश में सुपारी की सबसे बड़ी मंडी है। उत्पादन से मांग अधिक होने के चलते

विदेशों से सुपारी आयात करनी पड़ती है। सार्क देशों से आने वाली सुपारी पर सिर्फ 4 प्रतिशत टैक्स लगता है, जबकि अन्य देशों यानी इंडोनेशिया से आयात करने पर मूल टैक्स 108 प्रतिशत देना पड़ता है। नागपुर में हर महीने जो 300 गाड़ियां सुपारी आती है उसमें 200 गाड़ी विदेशी माल होता है। सूत्र बताते हैं कि इसमें अधिकतर माल इंडोनेशिया का घटिया माल होता है, जिसे सुपारी तस्कर पहले सार्क देशों में भेजते हैं। फिर फर्जी बिल, फर्जी फर्म के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार कर, संबंधित विभागों के भ्रष्ट अधिकारियों से सेटिंग कर माल को सार्क देशों का बताकर भारत लाया जाता है। ऐसा करने से इंडोनेशिया की इस सुपारी पर 108 की जगह केवल 4 प्रतिशत टैक्स लगता है। फिर उस पर यहां जीएसटी लगता है, वह भी कम ही होता है। इस शातिरी गे का अधिकतर माल नागपुर ही पहुंचता रहा है, लेकिन कुछ समय से डीआरआई की सख्ती के चलते बड़े गे बाज कारोबारी अंडरग्राउंड हो गए हैं। नागों के अंडरग्राउंड होने से नयेसपोलों को अपना खेल खुलकर खेलने का सुनहरा अवसर मिल गया है। य सपोले अब नागपुर में जो विदेशी माल ला रहे हैं वह चेन्नई पोर्ट से मिस डिक्लेरेशन के चलते 18 प्रतिशत टैक्स देकर ला रहे हैं, जबकि मूल टैक्स 108 प्रतिशत है। सूत्र दावा करते हैं कि इस खेल में एक कंटेनर के पीछे 10 लाख रुपये की तोड़ी यानी चढ़ावा संबंधित विभाग के कर्णधारों को दिया जाता है, ताकि कोई लफड़ा न हो। एक कंटेनर में करीब 27 टन माल होता है, जिसका बाजार भाव 1.15 करोड़ रुपयों के करीब होता है। ऐसे 200 कंटेनर विदेशी माल हर महीने नागपुर आ रहा है। इस खेल में यहां के दर्जन भर से अधिक बड़े खिलाड़ी धड़ाधड़ नोट पीट रहे हैं। ये मध्य भारत के बड़े-बड़े सुपारी व्यापारियों और गुटखा कंपनियों को माल सप्लाई कर रहे हैं। कंटेनर पहले इनके गोदाम में खाली होते

हैं और फिर ट्रक से वे सप्लाई करते हैं। इनका करोड़ों का माल कलमना के एक नामचीन कोल्ड स्टोरेज में पड़ा है। यहीं से सुपारी सप्लाई होती है। जिनका दबदबा तेजी से बढ़ता जा रहा है। खेलजारी रखे हुए है। इसकी अधिकांश सप्लाई गुटखा फैक्टरियों में है। मिलावटी माल गुटखा में आसानी से खप जाता है।

इन चालाक सुपारी व्यवसायीयों ने आजकल नागपुर के आस पास गोडाऊन बनाए है। कईयों के तो फार्म हाऊस हि इनका गोडाऊन है। जहाँ से ये लोग अवैध सडी सुपारी का कारोबार कर रहे है। इन गोडाऊन में बडे बडे कुत्ते भी पाल रखे है ता की आसपास का कोई व्यक्ती वहाँ आ ना सके।

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