श्रीराम प्रतिष्ठा दिवस पर जैन समाज द्वारा विशिष्ट आयोजन

नागपूर :-भक्तो के कण-कण में बसे भगवान राम के बिना लगभग ५०० वर्षों की प्रतिक्षा के बाद राम कृपा से ही राम की अयोध्या फिर राम के ही आशीर्वाद और भक्तो की दढ़ श्रद्धा से राममय होने जा रही है।

जैन धर्म में भी मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम को सिद्ध पुरुष माना है। शत्रुंजय गिरिराज जो सिद्धक्षेत्र है और जैनो के लिए पूरे ब्रह्मांड में सबसे ज्यादा पवित्र महातीर्थ है वो गिरिराज पे भी सिद्ध पुरुष श्री राम की प्रतिमा प्रतिष्ठित है और हर साल लाखों जैन जो यहाँ यात्रा करने आते है वो प्रभु राम के दर्शन का लाभ लेते है। अयोध्या की पवित्र भूमि में बैठकर जैन धर्म के प्राचार्यों ने कई शास्त्र, सूत्र रचे हैं। अयोध्या नगरी का जैन धर्म के लिए भी विशेष स्थान है, यहाँ विभिन्न तीर्थंकरों के जीवन से सम्बंधित १८ कल्याणक घटित हुए हैं| अयोध्या नगरी को वर्तमान चौबीसी के पांच-पांच तीर्थंकर (आदिनाथ, अजितनाथ, अभिनंद नाथ, सुमतिनाथ एवं अनंतनाथ) की जन्मस्थली होने का गौरव प्राप्त है| भगवान श्री आदिनाथ (श्री ऋषभदेव) का वर्णन ऋग्वेद, अथर्ववेद, मनुस्मृति और भागवत अदि ग्रंथो में व्यवस्थित वर्णन है।

राम जन्म भूमि के लिए जैनो ने भी बलिदान दिया है जिसे याद करने से आज हम भाव विभोर हो जाते है। हमें गौरव है वो भीलवाड़ा के बलिदानी सुरेश जैन पे जो राम मंदिर आंदोलन के समय १२ मार्च १९९१ को रैली के दौरान कार सेवकों को तितर बितर करने के लिए पुलिस द्वारा चलाई गोली से शहीद हुए थे। इस दौरान शाहपुरा ज़िले के ख़ामोर निवासी रतन लाल सेन भी उनके साथ शहीद हुए। राम कुमार कोठारी और शरद कुमार कोठारी सगे भाई थे, जो अक्टूबर १९९० में कार सेवा में भाग लेने के लिए अयोध्या आए थे। कोलकाता के निवासी कोठारी बंधुओं के अलावा उनके मां-बाप की और कोई संतान नहीं थी। जब बात हिन्दू राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा की है,जैन समुदाय का योगदान तो एक मिसाल बन गया है।

इतिहास ने जैनो के योगदान और बलिदान को सुवर्ण अक्षर से लिखा है और लिखेगा। राष्ट्र को गौरव है ऐसे जैन एडवोकेट पर जिसने राम मंदिर केस में फीस के तौर पर १ भी रुपया नहीं लिया। वकील पिता और बेटे की इस जोड़ी ने सुप्रीम कोर्ट में हिंदू पक्ष को राम जन्मभूमि केस में जीत दिलाई, जिसके बाद मंदिर बनने का रास्ता साफ हो गया। पिता हरि शंकर जैन और बेटा विष्णु शंकर जैन राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद, काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद और कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह में हिंदू पक्ष की ओर से पैरोकार हैं और एक जैन समुदाय का रत्न, विश्व वोरा, २१ साल का नवयुवक जिसके ऊपर विश्व को फक्र है। अहमदाबाद में साबरमती गुरुकुल का ये विद्यार्थी जिसने सिद्धि, मुहूर्त मार्तंड, मुहूर्त चिंतामणि, वृहद दैवज्ञ, बृहद पराशर होरा शास्त्र जैसे ग्रंथों का अध्ययन करके अभिजीत का सूक्ष्म मुहूर्त 88 सेकंड दिया गया। ये मूल आधार ग्रंथ हैं। जिसकी मदद से दिन भी तय हुआ।

नागपुर जैन संघ पवित्र प्रसंग को लेकर २२ तारीख को प्रत्येक जैन को घर घर में दीप जलाने का, रंगोली सजाने का, दुकान,ऑफिस के द्वार पर तोरण लगाने का, भोजन में शगुन का प्रतीक लापसी ,मिठाइयों का आहार ग्रहण करने का मार्गदर्शन भी जारी किया है। जैनो इस ऐतिहासिक प्रसंग की ख़ुशी सब को बाटेंगे।

श्री राम जन्मभूमि के लिए ७६ बार संघर्ष हुआ, जिसमें चार लाख से ज़्यादा हिंदुओं ने बलिदान दिया। इसलिए अयोध्या में राम मंदिर मात्र मंदिर निर्माण नहीं, अपितु भारत की उस पवित्र संस्कृति, आर्य देश के संस्कार, विस्मृत ज्ञान परंपरा, त्याग, सत्य, करुणा, समता, सामाजिक समरसता, इन सभी तत्वों को समाज से परिचित कराना है।प्रत्येक राम भक्त को विश्वास का सन्देश भेज रहा है की इस पुण्यवंत कार्य में विश्व भर के जैनो सदा आपके साथ है और साथ रहेंगे। श्री नागपुर जैन संघ के विपिन मेहता ,मौलिक सावडिया, मनीष मेहता, गणेशमल जैन, निखिल भाई कुसुमगर, सुभाष कोटेचा,पीयूष शाह, रविंद्र वोरा, एवं महेंद्र शेठ ने समाज के सभी बंधुओ से की श्रीराम प्रतिष्ठा महोत्सव पर हर घर दिप प्रज्लवन व प्रसाद वितरण करने की अपील की है ।

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