राम राज्य में “सेतू” केंद्र को लगा निजीकरण का ग्रहण

– जिला-तहसील कार्यालय में 30 जून से बंद हुई प्रमाण पत्र बनाने की सुविधा

– लाखों नागरिकों,विद्यार्थियों को मिलेगी अब “आपले सरकार” सेवा केंद्रों से प्रमाण पत्र बनाने की सुविधा

– डिजिटल और ऑनलाइन प्रमाण पत्र सुविधा के नाम पर जनता को लूटने का सरकारी खेल

नागपूर :- देश में एक तरफ “राम सेतु” को तोड़ने से बचाने और इसे राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के लिए राजनैतिक, धार्मिक और सामाजिक संगठनों की सर्वोच्च न्यायालय में कई सालों से जद्दोजहद शुरू हैं, वहीं दूसरी ओर शहर के जिला और तहसील कार्यालय में बरसों से नियमित रूप से शुरू नागरिकों, विद्यार्थीयों के शैक्षणिक और कार्यालयीन प्रमाण पत्रों को शासकीय दरों पर बनाने वाला “सेतु केंद्र” 30 जून 2023 से जिलाधिकारी के आदेश पर हमेशा के लिए बंद कर दिया हैं.

कुछ महीने पहले जिलाधिकारी ने जिला परिसर में बने सेतु केंद्र को बंद कर दिया था.अब तहसील कार्यालय की प्रमाण पत्र बनाकर देने की सभी सेवाएं भी पूरी तरह से बंद करके इसकी जिम्मेदारी महाराष्ट्र शासन द्वारा जारी किये गये “आपले सरकार” सेवा केंद्रों को सौंपी हैं.

सरकार के इस फैसले से जिला और तहसील कार्यालय में बंद की गयी नागरी सेवाओं से सरकार ने आम जनता को काफी परेशानी में डाल दिया हैं.

जिन नागरिकों को इस बारें में आज भी पता नहीं हैं वे दूर-दूर से रुपया और अपना कीमती समय बर्बाद करके आने के बाद मायूस होकर खाली हाथ वापस लौट जाते हैं.

महाराष्ट्र शासन की यह ऑनलाइन प्रमाण पत्र की सुविधा नागरिकों के लिए काफी महंगी और जी का जंजाल साबित हो रही हैं.सेतु केंद्र बंद करने से पहले सरकार ने यह सेवा अपने कार्यालयों में निजी हाथों को सौंपी थी जहां नागरिकों को काफी परेशानीयों का सामना करना पड़ रहा था.

अब यह सेवा निजी हाथों को सौंपने के बाद शहर में शुरू “आपले सरकार” सेवा केंद्रों पर प्रमाण पत्रों को बनाने के लिए शासन द्वारा निर्धारित दरों से ज्यादा रुपये नागरिकों से वसूलने की लगातार शिकायतें आ रही हैं.

बुधवार को एक नागरिक तहसील कार्यालय में प्रतिज्ञा पत्र बनाने के लिए गया तो वहां दरवाजे खिड़कियों पर सेतु केंद्र बंद करने का नोटिस चस्पां कर रखा था और उस पर बस्तीयों में शुरू आपले सरकार सेवा केंद्रों पर जाने की सूचना प्रकाशित की थी.

इस व्यक्ति ने कार्यालय के सामने ही प्रमाण पत्र बनाकर देने वाले दलालों से एफिडेविट बनाने के लिए पूछने पर 100 रुपये के स्टैंप पेपर और टाइपिंग के खर्च को छोड़कर 250 से 400 रुपये खर्च बताया और पूर्व नागपुर के एक आपले सरकार सेवा केंद्र पर जाने पर संचालक ने स्टैंप पेपर लेकर खुद टाईप करके लेकर आने पर 100 रुपये अतिरिक्त खर्च बताया.

पहले से शुरू कई आपले सरकार सेवा केंद्रों पर इसी प्रकार की खुलेआम लूट की शिकायतें हमेशा आती रही हैं.इन सेवा केंद्रों पर शासन ने जारी किये दिशा निर्देशों के अनुसार प्रमाण पत्र बनाने में लगने वाले शुल्क के दर पत्रकों को कार्यालय में लगाने के आदेश जारी किये थे.परंतु सरकार के इस आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए इन सेवा केंद्रों के संचालक दर पत्रकों को ऐसी जगह पर लगाते पाये गये जहां पर किसी भी नागरिक की नजर नहीं पड़ती थी.

इन सेवा केंद्रों के संचालकों की मनमानी पर शहर के समाचार पत्रों में बवाल मचने पर संचालकों ने जिलाधिकारी के आदेश पर दर पत्रक लोगों की नजर के सामने लगाना शुरू कर दिया.लेकिन नागरिकों को लूटना अभी भी बंद नहीं हुआ हैं.

राजस्व विभाग ने अपने कार्यालयों से यह सेवाएं बंद करके एक प्रकार से ऑनलाइन सुविधाओं के नाम पर अपनी जिम्मेदारीयों और कार्यालयों में कर्मचारियों की कमी और नई भर्ती के खर्चों से बचने के लिए हरदम के लिए पल्ला झाड़ लिया हैं और यह सेवा एक राजनैतिक साजिश के तहत निजी हाथों को देकर खुद का और आपले सरकार सेवा केंद्रों के संचालकों का खजाना भरने का षडयंत्र रचा गया हैं.

हाल ही में सरकार के आदेश पर जिला प्रशासन ने शहर – ग्रामीण में नये 153 आपले सरकार सेवा केंद्रों को शुरू करने के लिए कंप्यूटर केंद्र संचालकों से आवेदन मंगाये थे.इसमें 108 ग्रामीण क्षेत्रों में और शहर में 45 केंद्र देने की सरकार की योजना थी.इन 153 आपले सरकार सेवा केंद्रों के लिए कुल 1100 आवेदन पत्र प्राप्त हुए थे जिसमें 122 आवेदन (ग्रामीण 80,शहर 32) प्रशासन ने मंजूर करके इसकी पात्र और अपात्र आवेदकों की सूची अपनी वेबसाइट पर डाली थी.जो कि राजनैतिक दखल के चलते वेबसाइट से हटा दी गई हैं.अब इनकी मंजूरी के लिए प्रशासन को मुंबई से आदेश का इंतजार हैं.

इन सभी 153 आपले सरकार सेवा केंद्रों को सरकार की अनुमति मिलने पर भी भविष्य में नागरिकों से ऐसी लूट जारी रहेगी इस बात पर नागरिकों के सामने यक्ष प्रश्न खड़ा हुआ हैं.

शासन द्वारा प्रमाण पत्र बनवाने के लिए जारी दर पत्रकों और प्रमाण पत्र बनाकर देने की समयावधि को लेकर भी नागरिकों में काफी असंतोष हैं.पीड़ितों का मत हैं कि जो प्रमाण पत्र जिला और तहसील कार्यालय में एक दिन में ही हाथों हाथ मिलता था उसी काम को पूरा करने के लिए सूचना फलक पर 7 से 21 दिनों का समय तय किया हैं.ऐसे में नागरिकों को तुरंत में मिलने वाले प्रमाण पत्रों के लिए हफ्तों तक इंतजार करने के अलावा कोई भी चारा नहीं बचा हैं.

सरकार के इन नियमों का फायदा आपले सेवा सरकार केंद्रों के संचालक बड़े पैमाने पर उठाते हुए नजर आ रहे हैं.

लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर प्रमाण पत्र जल्दी बनाकर देने का लालच देकर सरकार द्वारा तय शुल्क से कई गुना ज्यादा रुपया नागरिकों से वसूला जा रहा हैं.

केवल अधिक राजस्व जुटाने की सरकार की घिनौनी मानसिकता के चलते शैक्षणिक और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए अनावश्यक प्रमाण पत्रों की अनिवार्यता लागू करके नागरिकों का आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण का खेल देश में वर्षों से जारी हैं.

नागरिकों,विद्यार्थियों के लिए हर कार्यालयीन और हर प्रकार के शैक्षणिक कामों के लिए कोर्ट एफिडेविट,आय प्रमाण पत्र,जाति प्रमाण पत्र,क्रीमी लेयर,नान क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट,डोमीसाइल सर्टिफिकेट,ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट की अनिवार्यता देश से पूरी तरह से खत्म करके केवल नागरिकों के शालेय लिव्हींग सर्टिफिकेट और जन्म प्रमाण को ही मूल दस्तावेजों के रूप में प्राथमिक ता देने का कानून बनाने की जरूरत हैं.

देश की 140 करोड़ जनता से हर साल अनेक सेवाओं में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष करों के रूप में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर 4 – 4 प्रतिशत सेस वसूली करने के बावजूद भारत का उज्जवल भविष्य बनाने में सिंह का योगदान देने वाले नागरिकों,विद्यार्थियों से शालेय और उच्च शिक्षा,स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर अनावश्यक प्रमाण पत्रों की अनिवार्यता और उंची-उंची फीस को शस्त्र बनाकर लूटपाट करने की सरकार की नीति प्रजातंत्र के लिए एक खतरें की घंटी हैं और इन जनप्रतिनिधियों की लोकसेवा के नाम पर ओछी राजनीति और घटिया मानसिकता का परिचय हैं.

( प्रेस नोट के साथ तहसील कार्यालय की फोटो और आपले सरकार सेवा केंद्र पर लगे दर पत्रक की फोटो संलग्न हैं.)

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