पोलिस की मदद से किसान परिवार का चेहरा खिल उठा

गडचिरोली – अक्सर देखा जाता है की लोग पोलिस विभाग के प्रती भिन्न तरह की सोच पाले देखे जाते है। या कहे खाकी वर्दी को देखकर खुद को दूर करने का कोशिश करते है । जब वही वर्दी वाले उनके नजदीक पहुंच कर उनके तकलीफ को अपने कंदों पर लेते है। तब लोगों की नजरिया भी बदल जाती है एवं उनके प्रती सम्मान की भावना जागृत होती है। कुछ ऐसे हि काम किया है गडचिरोली जिले के माओ ग्रस्त इलाका रेगुंटा मे तैनात पोलिस बल ने। यह ऐसा इलाका है जो कभी माओवाद का दंश झेल चुका है। भौगोलिक रुप से कठिन इलाका माना जाता है। जो आज भी कुछ हद तक पिछड़ेपन के अभिशाप से मुक्त नही हो सका है।

गडचिरोली जिले के रेगुंटा पोलिस 2 दिसंबर के दौरान अपने थाना क्षेत्र मे एरिया डोमिनेशन पर निकले हुए थे। उसी दौरान उन्होने देखा की नजदीक मे एक कपास के खेत मे एक किसान मधुकर लिंगय्या गड़पल्ली उम्र 45 वर्ष ,उनकी पत्नी एवं माँ तीनो हि मिलकर दो एकड़ के खेत मे लगे कपास को निकाल रहे थे। इसको देख कर रेगुंटा थाने के प्रभारी विजय सनप ने नजदीक जा कर उस किसान से पूछा की तुम तीनों हि कपास निकाल रहे हो। मजदूर नही लगाये है क्या। थाना प्रभारी की बात सुनकर किसान ने कहा सर मजदूर मिल नही रहे है। मिलते भी है तो मेरी इतनी हैसियत नही है की मै उनकी मजदूरी का भुगतान कर सकूँ । ऊपर से कपास के पौधों मे लगे फल फ़टने लगे है। हवा से उनमे लगा कपास भी कुछ हद तक उड़ने लगा है। इस तरह से मेरा नुक्सान भी हो रहा है। मजदूर की बात सुनकर रेगुंटा थाना प्रभारी ने अपने शीर्ष नेतृत्व के अधिकारियों से मार्गदर्शन लिया। थाना प्रभारी विजय सनत ने अधिकारियों को किसान की तकलीफ को बतायी। अधिकारियों की मार्गदर्शन का पालन करते हुए एरिया ड़ोमिनेशन पर निकली टीम के साथ खेत के भीतर जा कर दो एकड़ के खेती मे लगे कपास को लगभग 3 से 4 घंटे के मेहनत से निकाल कर किसान को सौंपा है। पोलिस विभाग की इस सहयोग से जहां किसान के खेत की कपास भी किसान को हासिल हुई। साथ हि उसकी मजदूरी का रकम भी बच गयी। थाना प्रभारी व दल मे शामिल सुरक्षा कर्मियों के इस सहयोग को लेकर किसान मधुकर गाडपल्ली व उनके पत्नी का चेहरा खिल उठा। वही उन्हीने पोलिस बल का आभार व्यक्त करते हुए उन्हे धन्यवाद दिया। विभाग के इस तरह के मानव सेवा व सामजिक कार्यों के चलते लोग विभाग के प्रती अपनी धारणा भी बदलते है । एव खाकी वर्दी को अपने हितैशी भी मानने लगते है।

स्थानीय लोगों की माने तो रेगुंटा थाना प्रभारी ने इससे पहले भी थाना क्षेत्र के अंतर्गत अनेक समाजिक कार्य किये है। बीते दिनों हि उन्होने ने गांव वालो के साथ मिलकर सड़क की मरम्मत किये थे। जिसमे विभाग के अलावा ग्रामीणों ने  श्रमदान किया था। सड़क पर से यातायात बाधित ना हो। उसके लिये अवैध अतिक्रमण को हटवाया था। वही भौगोलिक रुप से कहा जाए तो रेगुंटा थाना क्षेत्र माओ ग्रस्त इलाका माना जाता है। जहा पर तैनात विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों को थाने से बाहर निकलना किसी चुनौति से कम नही आंका जाता है। बावजूद उसके ग्रामीणों के साथ संपर्क बनाये रखते हुए सामाजिक कार्यों के बल्बुते लोगों का दिल जितना रेगुंटा जैसे पिछड़े इलाके मे किसी जंग जितने से कम नहीं आंका जा सकता है।

सतीश कुमार गडचिरोली

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