– स्वास्थ्य और अन्न औषधी विभाग सुस्त
पारशिवनी :- फिलहाल जिलेमें और राज्यमें सब तरफ हानिकारक रसायनीक फ्लेवरद्वारा बनाये जानेवाले और प्लास्टिक की पॉलीथिनके नलियों में एक , दोन रूपयोमे मिलनेवाली पेप्सी और फ्रूटीकी बिक्री ज्यादा होने लगी है . इसके वजहसे छोटे बच्चे और युवाओं में पेट और अतड़ियो का कैंसर और अन्य बड़े रोग होनेकी संभावना होनेसे पालकोने इसपर अधिक सजग होकर बच्चो का खयाल रखनेका सूचना का अधिकार कार्यकर्ता महासंघके राज्य कार्याध्यक्ष शेखऱ कोलते इन्होंने आवाहन किया है .
धुपकाले की सुरुवात होतेही सब तरफ नींबू शरबत, गन्ने और विविध फलोका रस , बर्फका गोला , विविध प्रकारके शितपेय (कोल्ड ड्रिंक) इनकी दुकानें हर गली मोहल्लोंमें सज चुकी है और उसकी मांग भी बढ़ चुकी है, इसके साथही स्वास्थ्य को घातक कई प्रकारके रसायननिक तत्वोसे उत्पादित और एक , दोन रुपयोमे बिकनेवाली पेप्सी और फ्रूटी छोटे बच्चों के साथ साथ युवाओ को भी पसंद आती है . सस्ती और अल्कोहोल न होने से पालक भी इसपर ज्यादा ध्यान नही देते है . लेकिन ये पेप्सी और फ्रूटी कई फ्लेवरके हानिकारक रसायनोसे बनाई जाती है . साथही इसका उत्पादन और पैकिंग किसी फैक्टरी में न होकर निवासी घर मोहल्लों और खुले जगहोंमें किया जाता है . जहाँ पानी और जगह की स्वच्छता की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नही दिया जाता .
खास बात यह कि प्लास्टिक पोलिथीनवाली यह पेप्सी और फ्रूटीकी कैंडी छोटे बच्चे और युवा दातोसे तोड़कर सीधा मुहसे चूसते है, इससे उसकी हानिकारक प्लास्टिक पॉलीथिन और उसके ऊपरके छपाईवाले अक्षरोका रसायनयुक्त पेंट बच्चो के पेटमे जाता है ,जिससे उन्हें पेट और अतड़ियोके कैंसर के साथही अन्य गंभीर बीमारियां होनेकी अधिक संभावना होती है.
एक और गंभीर बात है कि , एक दोन रुपयोमे बिकनेवाली इस पेप्सी और फ्रूटीके उत्पादकोके पास कानूनी तौरपर भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण ( FSSAI ) , अन्न एवं औषधी विभाग , स्वास्थ्य विभाग और वजनमाप विभागकी किसी भी प्रकारकी परमिशन और लायसेंस नही होता है , इसलिए इन कैंडीयो पर उत्पादक कंपनीका रजिस्ट्रेशन नंबर एवं वर्ष, पता, उत्पादन तारीख एवं वैधता, उसके कंटेन्स और ग्राहक मदत नंबर , किमत आदि महत्वपूर्ण जानकारी छपी नही होती है . इससे भविष्यमें बच्चोके स्वास्थ या जान की कोई हानि होनेपर पालक कही पर भी शिकायत या न्याय मांग ही नही सकते . छोटे बच्चे और युवाओ के स्वास्थ्य और जान को हानिकारक ऐसे खाद्य वस्तुओ और उनके उत्पादकोपर आजतक कही पर भी कारवाई होनेकी बात सामने नहीं आयी है , यह अतिविशेष ….
प्लास्टिक पॉलीथिनमें अवैध तरीकेसे खुलेआम बेचे जानेवाली इस घातक रसायनयुक्त पेप्सी और फ्रूटीपर और उनके उत्पादकोपर कही कारवाई होनेकी खबर हमने आजतक न सुनी और न देखी. अर्थात स्वास्थ विभाग और अन्न एवं औषधी विभाग यह शायद दबे या बिक चुके है . सरकारने ऐसे निकम्मे विभागोपर जनता का पैसा फालतू खर्च न करके इन दोनों विभागोको शीघ्र हमेशा के लिए बंद कर देना चाहिए . साथही अपने बच्चोंके स्वास्थ्य के प्रति पालकोने स्वयं सजग होना आवश्यक है .
– शेखर कोलते राज्य कार्याध्यक्ष- सूचना का अधिकार कार्यकर्ता महासंघ
ऐसे पेप्सी और फ्रूटीमें इस्तेमाल किया जानेवाला पानी दूषित होता है , प्लास्टिक पॉलिथिनमें कार्बन मोनोक्साइड और फ्लूरोकार्बन होता है , इंसमे इस्तेमाल होनेवाली सैक्रीन तो स्लो पॉइजनही है . कलर फ्लेवरमें फ्लोराइड़ की मात्रा अधिक होती है , इन सब वजहोंसे छोटे बच्चे और युवाओमे दातोकी बीमारियां, बारबार होनेवाली सर्दी ,खांसी और बुखार, पेटमें गांठे बनना , रोगप्रतिकारक शक्ति एकदमसे कम होना और इसके लगातार सेवन से आखरीमें पेट और अतड़ियो क़ा कैंसर और अन्य बड़ी बीमारियां होने की अधिक संभावना होती है , इसलिए इसपर अभिसे ही पालकोने सजग होकर ज्यादा ध्यान देना चाहिए .
– डॉ. ओंकार केळवदे