आंगनबाड़ी सेविकाओ के सामने लगा समस्याओ का अंबार

– कई तरह की समस्याओं का करना पड रहा है सामना

– शाशन – प्रशासन समस्या के समाधान के प्रति उदासीन

– लगभग 9 महीने से बकाया है ईंधन खर्च – अल्प वेतन से मासिक ईंधन खर्च कैसे प्रबंधित करें?

रामटेक :- मामूली वेतन पर घर चलाने के लिए संघर्ष कर रही आंगनबाड़ी सेविकाओको वर्तमान में विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। यहाँ प्रमुख समस्या शिशुओं के लिए पोषण आहार पकाने के लिए आवश्यक ईंधन है और पिछले नौ महीनों से सरकार ने आंगनबाड़ियों को ईंधन खर्च का भुगतान नहीं किया है, लेकिन यह अतिदेय है, इसलिए आंगनवाड़ी सेविकाओ के सामने एक गंभीर प्रश्न खडा है कि इसे कैसे पूरा किया जाए।

इस संबंध में जब कुछ आंगनबाड़ी सेविकाओ से भेट कर बातचीत की तो उन्होंने जनप्रतिनिधि के सामने समस्याएं पढ़ीं. उन्होंने बताया की ईंधन बिल की बात करें तो जून 2022 से सरकार ने आंगनबाड़ी में बच्चों को पोषन आहार देना शुरू कर दिया है. आंगनबाड़ी सेविका अपने खर्चे पर खाना बनाने के लिए ईंधन यानी सिलेंडर का भुगतान कर रही है। तहसिल में इस समय 50 फीसदी आंगनबाड़ी मे सिलेंडर खत्म हुवा है अब सिलेंडर भुगतान कैसे करे और पोषण आहार कैसे पकाए यह आंगनबाडी सेवीकाओ के सामने एक गंभीर प्रश्न है क्योंकि सरकार ने आंगनबाडी सेवकों को पिछले नौ महीने के ईंधन खर्च का भुगतान अभी तक नहीं किया है और यह बकाया है। आंगनबाड़ी सेविकाओं ने बताया कि सुपरवाइजर से पूछने पर कार्यालय में ईंधन खर्च आ गया है और जल्द ही दिया जाएगा लेकिन अभी तक ईंधन लागत की राशि हम तक नहीं पहुंची है. अल्प और समय पर नहीं मिलने वाले मानधन राशी मे उनके घर का खर्चा चलाना चाहिए या मिलने वाले पारिश्रमिक में पोषण आहार पकाने के लिए सिलेंडर भरना चाहिए यह गंभीर प्रश्न उनके सामने खडा हुवा है। साथ ही आंगनबाड़ी के रखरखाव के लिए हर साल दो हजार रुपए आते हैं, लेकिन वह भी नियमीत रूप मे नही मिल रहे हैं। और पैसा आने पर सबसे पहले सुपरवाइजर 1000 और फिर 1200 का रजिस्टर खरीदने को कहती है फिर बचा हुआ पैसा साल भर के लिए काफी नहीं होता है। साथ ही सी.बी.ई. आंगनबाड़ी के कार्यक्रमों का संचालन आंगनबाडी सेविका द्वारा किया जाता है और आंगनबाड़ी सेविका स्वयं खर्च वहन करती हैं। लेकिन अगर पर्यवेक्षक से पूछें कि खर्च के पैसे कब मिलेंगे, तो ‘आपके पैसे आएंगे’ ऐसा शुद्ध आश्वासन सेविकाओ को मिलता है लेकिन हमें भी नियमित रूप से नहीं मिलता, इसके लिए सेवीकाओ की मांग है कि सीबीई कार्यक्रम के पहले फीस दें और फिर कार्यक्रम लेने को कहें। इसी प्रकार सरकार द्वारा प्रति वर्ष सेवकों को गणवेश प्रदान किया जाता है लेकिन वह भी निर्धारित समय पर पैसा नहीं आता । टी.ए. बिल के बारे में बात करते हुए सेविकाओ ने कहा कि सभा में जाते समय अपने खर्चे पर जाना पड़ता है, सभा चाहे किसी भी गाव में हो, लेकिन यात्रा का किराया पांच पाच साल तक नहीं मिलता है, इसलिए यात्रा की राशि किराया हर साल देना चाहिए। साथ ही पारिश्रमिक के बारे में बताते हुए कहा कि पिछले दो साल से आंगनबाड़ी सेविकाओं के वेतन में वृद्धि की बात चल रही है लेकिन अभी तक सेविकाओं को वेतन वृद्धि नहीं मिली है. बढ़ती महंगाई और आंगनबाड़ी सेविकाओ के कार्यभार को ध्यान में रखते हुए सरकार मिनी आंगनबाडी सेविकाओ और सहायिकाओं के मानदेय में संतोषजनक वृद्धि करे। साथ ही, अन्य सभी स्कूलों की तरह, आंगनवाड़ी में कम से कम एक महीने के लिए गर्मी की छुट्टियां दी जानी चाहिए साथ ही यदि कोई आंगनबाड़ी सेविका गंभीर रूप से बीमार पड़ जाती है तो उसका वेतन काट दिया जाता है, उन्होंने मुलाखत के दौरान मांग की कि हमें कम से कम पंद्रह दिनों का चिकित्सा अवकाश दिया जाए ।

महिला एवं बाल कल्याण परियोजना अधिकारी माया पाटिल से जब स्थानीय महिला एवं बाल कल्याण विभाग के कार्यालय में जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की इन सभी समस्याओं के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि आंगनबाडी के लिए आवश्यक ईंधन लागत की राशि सरकार से नहीं अभी आयी नही है. , वह आने पर दि जाएगी। आंगनबाड़ी भत्ता के लिए भी हमने 25 जनवरी को मांग की थी, लेकिन अभी तक नहीं आया, जब आएगा तब दिया जाएगा। यात्रा भत्ता ग्रैंड आने पर दिया जाता है। साथ ही गणवेश के लिए जितनी धनराशि की मांग की गई थी, उतनी शासन से प्राप्त नहीं हुई, इसलिए हमने उस राशि का उपयोग नहीं किया, पुरी राशी आनेपर वितरण किया जाएगा ऐसा महिला एवं बाल कल्याण परियोजना अधिकारी माया पाटिल ने जानकारी देते हुए बताया. ।

@ फाईल फोटो

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